सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बी माय परफेकट ऐंडिंग किताब की शुरूआत || लेखकः अर्पित वगेरिआ

किताबः बी माय परफेकट ऐंडिंग 

लेखकः अर्पित वगेरिआ

यू आर दी बेस्ट वाईफ, अजय के पांडे द्वारा लिखी खुबसूरत किताब पढ़ने के बाद मेरा रूझान रोमांटिक नावल की ओर हो गया। सोचा क्युं ना एक और रोमांटिक नावल पढ़ा जाये पर अब किसी और लेखक का। 

हालांकि मैने अजय के पांडे के दो और नावल मंगवा लिये हैं पर सोचा पहले किसी और लेखक की लेखनी पढ़ी जाये।

इसके लिये मैने चुनी है किताब बी माय परफेकट ऐंडिंग। अर्पित वगेरिआ ने ये किताब लिखी है। किताब पढ़ने की इच्छा यह जानने के बाद और दुगनी हो गयी कि लेखक और कहानी का पात्र दोनो ही एक टेलीविज़न लेखक है। बचपन से घर पर टेलीविजन सिरीयलज़ देखते आये हैं तो नावल से पहले टीवी ही मेरे लिय इंटेरटेनमेंट का पहला माध्यम था। 

सोचा शायद यह नावल टीवी स्टारज़ की चकाचैध भरी जिंदगी से जुड़ा होगा। यह किताब शुरूआत में बाम्बे की चकाचैध में जी रहे एक टेलीविज़न के लेखक की जिन्दगी दिखती है जो महत्वाकांशी है। जीवन में सच्चा प्यार तलाशने और अपनी जड़ों को ढूंढने की कोशिश कर रहा है। शुरूआती पन्ने में अरमान  अपनी प्रोफेशनल लाईफ में निराश और उलझा-उलझा सा रहता है। वहीं दूसरी और प्यार और नये रिलेशनशिप के लिये काफी डेसपरेट लगता है। इतना कि सपनों में खुद को लड़कियों संग देखता रहता है। पर उस लड़की का चेहरा नही देख पाता, किसी फिल्म की कहानी की तरह। शुरूआती पन्ने मुझे काफी स्लोमोशन में चल रही फिल्म की स्टोरी जैसे लग रहे हैं। किताब का पूरा रिव्यू जल्दी ही आप सबके साथ सांझा करूंगी।

शब्दों की दुनिया से

रूचिका सचदेवा

जरूरी सूचना: मैं आलोचक या रिवयुअर नही ब्लाॅगर हुं जो विचार सांझा करती हुं। किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई मकसद नही। मैं केवल शब्दों के पीछे छुपी निशब्द भावनाओं को पढ़ने की कोशिश कर रही हुं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मर्द वो जो औरत नही और औरत वो जो मर्द नही

हम जिस पल जन्म लेते हैं उसी पल से हमारा वर्गीकरण शुरू हो जाता है। औरत है या मर्द ? जाति कौन सी है? रंग कैसा है? गरीब है या अमीर?  हम जिस पल जन्म लेते हैं उसी पल से हमारा वर्गीकरण शुरू हो जाता है। औरत है या मर्द ? जाति कौन सी है? रंग कैसा है? गरीब है या अमीर? और ये सब वर्गीकरण अपने आप को बुद्यिमान कहलवाने वाले समाज के ठेकेदार करते हैं। अगर ये भेदवाव सच में कुछ मायने रखता है, तो जाति धर्म के ठेकेदारों से कभी पूछो तो.. कि अछुत मान कर किसी के हाथ का खाना खाने से मना करने वालों ने कभी ये कहा है कि हम अपनी जाति व धर्म द्वारा उगाया अन्न ही खाऐंगे। उन्ही के द्वारा उगायी कपास का बना कपड़ा पहनेंगे। उसी जाति के डाक्टर से ईलाज करवायेंगें। उसी के हाथ का बना जूता पहनेंगे। नही धर्म के ठेकेदारों ने बड़ी चतुराई से लोगों को इस भेदभाव में उलझा दिया ताकि असली मुद्दों पर बातचीत करने से लोग भटक जाये। समय ही निकाल पाये असली मुद्दों पर बात करने का।         ये रंगभेद मज़ाक सा लगता है मुझे। ये मज़ाक नही तो क्या है? रंग के आधार पर सुन्दरता को आंकने वाले से कभी पूछा है कि सफेद रंग को...

We Support Farmers

ये आंसू नहीं सैलाब है  जो बहना भी जानते हैं और बहाकर ले जाना भी यह नीचे  गिरती नदी नहीं  दिल की आह से आया सैलाब है जो  तबाह कर देगा  तेरी  'मैं' और तेरा 'सब' © Penned by : IG/@ruchikasachdeva_ #rakeshtaket #farmersprotest #supportfarmers

The Quirky Wallflower and the Silent Bumble Bee by Nazam Riar

किताब: द क्वरकी वॉल फ्लावर एंड साइलेंट बंबलबी लेखिका:  नज़म रिआर  नज़म रिआर जी की किताब "द क्वरकी वॉल फ्लावर एंड साइलेंट बंबल बी"   मुझे  नज़म रिआर जी से तोहफे में मिली है। किताब मेरे बहुत ही अज़ीज दोस्तों वनिता खन्ना व उनके पति जे बी सिंह अटवाल मेरे लिये दोस्ती का फर्ज समझ कर लेखिका से पर्सनल मैसेज लिखवा कर लाये। शायद वे दोनो जानते थे कि मेरे लिये एक औरत और एक इन्सान होने के रूप मे यह एक बेहद अच्छा तोहफा सिद्ध होगा। यह किताब किस बारे में बात करती  है ?  दर्द भरे दिलों की खुद को गमों से उबारने की औरत के सशक्तिकरण की जिन्दगी में प्यार की अहमियत की बाहरी दुनिया में खुशियां ढूंढने की ब्जाय खुद के भीतर खुशियां तलाशने की किताब के कुछ ही पन्ने पढ़ पायी हुं मगर खुश हुं कि मेरे लिये किसी ने ऐसा बेहतरीन तोहफा लिया । 🙏 यह मेरे लिये या औरतों के लिये ही नही, किसी भी व्यक्ति के लिये खास तोहफा हो सकता है जो जिन्दगी में कई सवालों से घिरा है। किताब का पूरा रिवयू जल्द ही सांझा करूंगी। वनिता खन्ना व जे बी सिंह अटवाल ने लेखिका के साथ कुछ पल सांझा किये जिन्हे उन्होन...